Thursday, April 9, 2020

Dil Kahe...

दिल कहे......तन्हाई करें आगाज़ ये राज़ क्या हैं ?

 

बेहिसाब ये जो बेक़रारी है, कुछ तो है दरमियाँ हमारे,

वक़्त कि लगी जिस पे पहरेदारी हैं !!

मालूम है तुझको भी इस दर्द की हक़ीक़त,

खाए ज़ख़्म सीना भी कलाकारी हैं !!

दिल कहे......आ बैठ संग मन की अनकहीं कह दे यहीं, 


तेरी वफ़ा का तसव्वुर करना भी 

फ़िर शहर -ए- ग़म से करना यारी हैं !!

देख शोहरत हुए ग़ुम तेरे होश हैं इल्म नहीं तुझे,

एक शमा आज भी मेहफ़िल में तेरी ख़ामोश हैं !!

दिल कहे......आज भी साहिल से दूर सहरा हैं,


मेरे हिस्से में भी ख़ुद की हुक़ूमत जमा रखी हैं !

अपनी क़ातिल निग़ाहों से मुझे दरबान बना रखा हैं !!

आ गया महकने का हुनर भी सूखे लफ्जों को

तेरे गज़रे को जब से क़िताबों में छुपा रखा हैं !!

दिल कहे......मुड़कर देखा नहीं चाँद फिर कभी 

तेरे तिल ने इस क़दर नज़र बाँध रखा हैं  !!


Saturday, April 4, 2020

Dard ka Rishta.....


दर्द -ए -दिल है ये उनको दिखाऊ कैसे,

ज़ख़्म ये आम नहीं है सबको बताऊ कैसे,

मान चले थे ख़ुदा जिसे,

हर रिश्ता जहाँ बना भूला क़िस्सा,

जमा किये इन हथेली से टूटे हिस्सें,

फ़िर वहीं हाथ उस दर पसारु कैसे...........,


दर्द -ए- दिल है ये.........

बुझा - बुझा सा चाँद पड़ा फ़लक पर,

सिलसिला भी थमा है मिलने का छत पर,

बैठ हर रात ढूँढू चाँद में सूरत तेरे जैसी, 

है ये आदत पुरानी भूल जाऊ कैसे............,

दर्द -ए -दिल है ये......... 

जाने किस नूर से रौशन है दिए इस महफ़िल के,

लगा रखें है पहरे हर चिराग़ों पे,

मालूम न चला रंगीनियों से सजा ये शहर,

बना आज मेरे लिए ज़हर कैसे.............,

दर्द -ए -दिल है ये.......... 

मेरी बेचैनियों का सबब जब कोई पूछे,

दबी आरज़ू है दफ़न किसी कोने में ,


धुआँ बन कभी उठता है जलन सीने में,


जलन ये आम नहीं........ 


ये इश्क़ -ए -जलन है सबको बताऊँ कैसे.........., 

दर्द -ए -दिल है ये..........