दर्द -ए -दिल है ये उनको दिखाऊ कैसे,
ज़ख़्म ये आम नहीं है सबको बताऊ कैसे,
मान चले थे ख़ुदा जिसे,
हर रिश्ता जहाँ बना भूला क़िस्सा,
जमा किये इन हथेली से टूटे हिस्सें,
फ़िर वहीं हाथ उस दर पसारु कैसे...........,
दर्द -ए- दिल है ये.........
बुझा - बुझा सा चाँद पड़ा फ़लक पर,
सिलसिला भी थमा है मिलने का छत पर,
बैठ हर रात ढूँढू चाँद में सूरत तेरे जैसी,
है ये आदत पुरानी भूल जाऊ कैसे............,
दर्द -ए -दिल है ये.........
जाने किस नूर से रौशन है दिए इस महफ़िल के,
लगा रखें है पहरे हर चिराग़ों पे,
मालूम न चला रंगीनियों से सजा ये शहर,
बना आज मेरे लिए ज़हर कैसे.............,
दर्द -ए -दिल है ये..........
मेरी बेचैनियों का सबब जब कोई पूछे,
दबी आरज़ू है दफ़न किसी कोने में ,
धुआँ बन कभी उठता है जलन सीने में,
जलन ये आम नहीं........
ये इश्क़ -ए -जलन है सबको बताऊँ कैसे..........,
दर्द -ए -दिल है ये..........
ज़ख़्म ये आम नहीं है सबको बताऊ कैसे,
मान चले थे ख़ुदा जिसे,
हर रिश्ता जहाँ बना भूला क़िस्सा,
जमा किये इन हथेली से टूटे हिस्सें,
फ़िर वहीं हाथ उस दर पसारु कैसे...........,
दर्द -ए- दिल है ये.........
बुझा - बुझा सा चाँद पड़ा फ़लक पर,
सिलसिला भी थमा है मिलने का छत पर,
बैठ हर रात ढूँढू चाँद में सूरत तेरे जैसी,
है ये आदत पुरानी भूल जाऊ कैसे............,
दर्द -ए -दिल है ये.........
जाने किस नूर से रौशन है दिए इस महफ़िल के,
लगा रखें है पहरे हर चिराग़ों पे,
मालूम न चला रंगीनियों से सजा ये शहर,
बना आज मेरे लिए ज़हर कैसे.............,
दर्द -ए -दिल है ये..........
मेरी बेचैनियों का सबब जब कोई पूछे,
दबी आरज़ू है दफ़न किसी कोने में ,
धुआँ बन कभी उठता है जलन सीने में,
जलन ये आम नहीं........
ये इश्क़ -ए -जलन है सबको बताऊँ कैसे..........,
दर्द -ए -दिल है ये..........

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